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5 Mar 2017 · 1 min read

होली

होली
ना शीत, ना ही पावस की जलधार…
है ये इंद्रधनुषी फाल्गुनी बयार…
इंदु गर्वित है नव यौवन से
धरा-नभ प्रफुलित है सब रंग से

मादक हो मन मयूर गुलाल हुआ
अक्षत,अबीर,भंग,रोली का चौपाल हुआ

नर-नारी रत हैं रंगों की क्रीड़ा में
तिरोहित हुआ तमस, ना रहे कोई पीड़ा में

समस्त जन प्रीत के मीत बने
मेरी शुभकामनाओं की यह रीत चले

सुनील पुष्करणा

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