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1 Mar 2017 · 1 min read

तुम -----फबती हो

गजल

चाहत के मकान में तुम रहती हो
दिल के दरपन में तुम फबती हो

जब पहने हीरे का हार गले में
नभ में बिजुली सी मुझको लगती हो

नजरें झुकी झुकी हो जब तेरी
अदा यही तो दिल मेरे खिलती हो

मुस्काँ प्रिया जो तेरे होठों पर
बगिया में फूल की तरह सजती हो

नित्य चली आती हो जब सपने में
ख्यावों सी उठ ख्यालों में नचती है

डॉ मधु त्रिवेदी

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