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27 Feb 2017 · 1 min read

मुक्तक

कबतक रहेगी मेरे सब्र की घड़ी?
हरवक्त रुलाती है यादों की लड़ी!
बेबसी का दौर है आज भी कायम,
दर्द की लकीरें हैं मेरी हथकड़ी!

#महादेव_की_कविताऐं'(21)

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