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25 Feb 2017 · 1 min read

II राह में था काफिला....II

राह में था काफिला भी खो गया l
मंजिलों का आसरा भी खो गया ll

वह न आए याद क्यों जाती नहीं l
अक्स खोया आईना भी खो गया ll

यह जमाना मानता है आपको l
दुश्मनों का हौसला भी खो गया ll

क्या करें हम गर्दिशों के दरमियां l
साथ मिलना आप का भी खो गया ll

शान तेरी क्या गिरी कुछ भी “सलिल”l
जो सिकंदर वक्त का भी खो गया ll

संजय सिंह “सलिल”
प्रतापगढ़ ,उत्तर प्रदेश l

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