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24 Feb 2017 · 1 min read

मुक्तक

तेरी चाहत मेरी आजमाइश सी है!
मेरी जिन्द़गी की एक नुमाइश सी है!
शाम भी रोती है तन्हाई में अक्सर,
रात गमे-जुदाई की फरमाइश सी है!

#महादेव_की_कविताऐं'(23)

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