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23 Feb 2017 · 1 min read

??सीख ले ले यार??

इंसान ज़्यादा इंसानियत कम देखी है।
मज़े से अपनों ने आँख नम देखी है।।

दूँ किसके प्यार की दुहाई यहाँ दोस्त!
हर किसी की टूटती क़सम देखी है।।

विश्वाश दिया वही मौन हुए वक्त पर।
मरी आत्मा उनकी हरक़दम देखी है।।

उम्मीद की चादर तब छोटी लगी जब।
इंसानी नीयत इंसान पर बेरहम देखी है।।

ऊपर से हर चीज़ नीचे गिरती है यार।
ज्वार की भाटे में यही इल्म देखी है।।

गिरगिट न बन तू मौसम न बन कभी।
मिट जाएगा सुन मैंने पूर्णिमा देखी है।।

धूप-छाँव-सी यहाँ ज़िन्दगी की फितरत्।
पल-पल बदलती यहाँ हर रस्म देखी है।।

गुमान न कर सूरत पर इतना कामिनी।
वक्ते-पानी से बुझती शै गरम देखी है।।

नफ़रत भूल ये दुनिया रंगीन हो जाएगी।
प्यार में आइने की रुह नरम देखी है।।

“प्रीतम”हँसकर हर किसी को गले लगाले।
प्यार में हीरे-सी चमक असीम देखी है।।
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राधेयश्याम….बंगालिया….प्रीतम….कृत
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