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22 Feb 2017 · 1 min read

मुक्तक

जब भी मैं शाँम की तन्हाइयों में चलता हूँ!
बेकरार पलों की खामोशियों में ढलता हूँ!
दर्द के पायदानों से गुजरती है जिन्दगी,
धीरे-धीरे हसरतों की आग में जलता हूँ!

#महादेव_की_कविताऐं’

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