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21 Feb 2017 · 1 min read

%% ख्यालात %%

मैने पूछ ही लिया ,
ख्यालात से
तेरा भी जवाब नहीं
न जाने कौन सी लय में
यादों का पिटारा ले कर
तू आ जाता है
वक्त- बेवक्त समझाने को
क्यूं चला आता है
न आराम करने देता है
न तू बात करने देता है
तेरी लीला है सब से अलग
जब तू बात करता है तो
मुझ को सब से अलग करता है
तू यूं ही न चला आया कर
मुझ जो औरों से
न तू जुदा कर !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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