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20 Feb 2017 · 1 min read

मुक्तक

तेरी तस्वीर को कबतलक देखूँ?
जख्मे-तकदीर को कबतलक देखूँ?
सिसकते लफ्ज़ हैं लबों पर मेरे,
गम की जंजीर को कबतलक देखूँ?

#महादेव_की_कविताऐं’

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