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19 Feb 2017 · 1 min read

मुक्तक

तेरे दर्द को मैं ईनाम समझ लेता हूँ!
तेरे प्यार को मैं इल्जाम समझ लेता हूँ!
सब्र टूट जाता है जब कभी पैमानों का,
जिन्दगी को मयकशे-जाम समझ लेता हूँ!

#महादेव_की_कविताऐं'(25)

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