Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
19 Feb 2017 · 1 min read

निशाने आ गया

 वज़्न – 2122 2122 212

आज में तुमको बताने आ गया।
दिल मिरा तेरे निशाने आ गया।

ज़ीस्त सारी कट गई इक़ साँस में।
प्यार जब मुझको डुबाने आ गया।

ज़ुल्फ़ तेरी मै सँवारू रात दिन।
वक्त ऐसा मस्त पाले आ गया।

खुद खुदा भी बेखुदी को छोड़ कर।
साथ तेरा क्यों निभाने आ गया।

झूमती कलियाँ चमन में खुद ब खुद।
जब भंवर उनको रिझाने आ गया।

रात भी अब सिमटने यूँ लगी।
जोश मानो अब ठिकाने आ गया।

तिफ़्ल सारे दौर के सहमे हुए।
इल्म उनको जो रुलाने आ गया।

क्यों जवानी रो रही है आज कल।
दौर ऐसा अब सताने आ गया।

गंध चम्पा सी झरे यूँ जिस्म से।
बाग ज्यो निकहत लुटाने आ गया।

रूह कम्पित जो हुई लख हादसा।
जान जोखिम जो उठाने आगया।

ख्वाब मिटते जा रहे ‘मधु’ या खुदा।
उम्र का यह दौर जाने आ गया।

******मधु गौतम 18 02 2017

Loading...