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18 Feb 2017 · 1 min read

शायरी

हमने तो बहुत पुकारा तेरा नाम , दिल को समझा के
पर वो कहता था, गलत फ़हमी में न जिया करो यार
उनको अगर होना होता न तुम से प्यार ओ पागल
अब तक भेज चुके होते तेरे लिए अपना फरमान !!

दूरियां घटा कर जो हम ने अपनी चाहत बना डाली
उनके लबों की हंसी को अपनी फितरत बना डाली
उनके मुस्कुराने का अंदाज इतना ज्यादा निराला है
हम ने तो उनके साथ अपनी सारी दुनिया बना डाली !!

अजीत तलवार
मेरठ

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