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17 Feb 2017 · 1 min read

II...सुकून...II

खत्म होना ख्वाइशों का, ही सुकून बन जाएगा l
ना मिलेगा कुछ भी बाहर, भीतर ही मिल जाएगा ll

तू अकेला तो निकल ,रास्ते ही बन जाएंगे मंजिल l
बात मेरी मान लो खुद-ब-खुद ,कारवां बन जाएगा ll

संजय सिंह” सलिल ”
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश l

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