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17 Feb 2017 · 1 min read

हृदय वीणा हो गया

जल उठे साथी हमारा चौड़ा सीना हो गया ।
ज्ञानगुरु-चौखट तथा श्रम का पसीना हो गया है।
बोध की चाहत में जागृत भाव से आगे बढा।
समय ने पुनि-पुनि सँवारा, हिरदय वीणा हो गया।

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

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