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14 Feb 2017 · 1 min read

कविता : आजकल हम बेवजह मुस्कुराने लगे हैं

जिनको कभी थे हम नज़रंदाज़ करते,
धड़कन बन दिल में वो समाने लगे हैं !
आजकल बेवजह हम मुस्कुराने लगे हैं !!

बदलने लगा है कुछ अंदाज़ अपना भी,
चुप रहते थे पर अब गुनगुनाने लगे हैं !
आजकल बेवजह हम मुस्कुराने लगे हैं !!

जिन आँखों में कभी था, अश्कों का समन्दर,
उन आँखों में सपने सजाने लगे हैं !
आजकल बेवजह हम मुस्कुराने लगे हैं !!

सजाए हैं जिनके ख्यालों में मेले,
ख्वाबों में उनके भी आने लगे हैं !
आजकल बेवजह हम मुस्कुराने लगे हैं !!

अंजु गुप्ता

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