Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
13 Feb 2017 · 1 min read

हाइकु : जर्जर काया

हाइकु

जर्जर काया,
इच्छाएँ खंडहर,
जीने को मरे

नम नयन,
गालों के सूखे आँसू,
पुकारें तुम्हें !

छायी बदरी,
व्याकुल फिर मन,
गीला तकिया !

लकीरें मेरी,
हैं विधाता ने लिखीं,
बदलूंगी मैं !

अंजु गुप्ता

Loading...