Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
13 Feb 2017 · 1 min read

सातवां आसमाँ

मैं अक्सर देखता हूँ
उनकी राह
जो बैठे हैं
सातवें आसमाँ पर
इन्सान को भूलकर,
हे प्रभु!अल्लाह!गॉड!…
कब समझेंगे
इन्सान की पीड़ा
और बेबसी,
क्या पैगाम नहीं मिला,
धरती पर आपके प्रतिनिधि का
जो मुस्कुरा रहे हैं
बैठे सातवें आसमां पर.
आइये,
क्यों डर रहें हैं ?
धरा पर आने में
नहीं बेचेगा आपको यह इन्सान
सब कुछ बिक चुका है,
कुछ भी शेष नहीं,
बस!
शेष है तो,
आपका एक अवतार.

Loading...