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13 Feb 2017 · 1 min read

II....तुम्हारे बाद ये मौसम...II

न जाने दूंगा अभी तुमको बारिशो में मैं l
तुम्हारे बाद ये मौसम बहुत सताएगा ll

नहीं उसे कभी होता गुमान अपने पर l
उठा यहां जो जमीन से कहा इतराएगा ll

तेरी खामोश निगाहें बता रही हमको l
नहीं जो आज तो कल ही हमें रुलाएगा ll

नहीं निभी जो तेरी जहां बनाने वाले से l
करूं भी कैसे भरोसा वो क्या निभाएगा ll

संजय सिंह “सलिल”
प्रतापगढ़,उत्तर प्रदेश l

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