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11 Feb 2017 · 1 min read

मुक्तक

होकर दूर तुमसे मैं जाऊँगा कहाँ?
अश्कों को पलकों में छुपाऊँगा कहाँ?
बेहिसाब गम हैं मौजूद जिन्दगी में,
मंजिलें नसीब से मैं पाऊँगा कहाँ?

#महादेव_की_कविताऐं'(22)

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