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11 Feb 2017 · 1 min read

II लम्हा II

लम्हा लम्हा याद तुम्हारी,
जर्रा जर्रा महके है l

हर पल ही अब मधुर मिलन है,
प्यासा तन मन चहके है l

इंतजार की बात नहीं अब,
कोई नाज ना नखरे हैं l

मदमस्त पवन के झोंकों सा ,
मन लम्हा-लम्हा बहके है l

संजय सिंह “सलिल”
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश l

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