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10 Feb 2017 · 1 min read

जय हिंद

मैं गूंगा हूँ मगर लिखकर तुझे बतला रहा हूँ मैं
बचा लो वतन की इज्जत यही दिखला रहा हूँ मैं
ये भारत ही तुझे अब तक सुखनवर बन संभाला है
बचा लो इसकी इज्ज़त अब यही समझा रहा हूँ मैं

अभिषेक पान्डेय उज्ज्वल

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