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10 Feb 2017 · 1 min read

बडा हो गया बचपन

जादू की पोटली
अलादीन के चिराग
रंगीन सी बातों
रंगों ,सपनों में गुम
चंपक नंदन की बातें
कागज की नाव
लकडी मिट्टी के खिलौने
अब वैसे नही हो तुम
कहीं खो गये हो बचपन
तब कहां मालूम था
तितलियों के पीछे भागने
में पेट नही भरा करते
अलग अलग रंगों से
भरे रंगीन कैनवाश
जीवन में इतनी आसानी
से उतरा नही करते
जब चित्र बनाये घरों व
फुलों से लदे आंगन के
तब कहां मालूम था
घर बनाते एक दशक
चुटकियों में निकल कर
कई सवाल, संकेत
पीछे छोड जाते है
बडा होकर भी बचपन
अजब हैरान करता है
अकेले में बैठो तो चुपके से
कभी कभी मन ही मन
वो आज भी शैतानियां
बेमिशाल करता है,यूंही बस
देखते ही देखते बडा हो गया
एक छोटा सा बचपन !!!!!

नीलम नवीन “नील”
देहरादून

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