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7 Feb 2017 · 1 min read

शायरी

कितना भी न क्यूं, हो जाना दूर मुझ से,
तुम्हारा दिल कभी भी, तुम्हारा गवाह न बन पायेगा,
वो पल पल चाहता, तो है बेचारा मुझ को,
इक दिन सरे राह, धोखा तुम को वो दे जाएगा !!

रुखसत होने से पहले , याद कर लूँगा,
मैं अपनी यादो के साथ, ही अब विदा हूँगा,
तुम याद न करना, कभी भी मुझ को,
क्यूं की दर्द का पिटारा, तुम्हारे साथ ही अब होगा !!

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