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6 Feb 2017 · 1 min read

जीवन के मदिरालय में

सोम सुधारस पान करें हम,

जीवन के मदिरालय में l

झगड़े झंझट छोड़- छाड़ सब,

प्यार भरे मदिरालय में ll

तेरी चाहत में जग मिथ्या,

निज जीवन का मर्म यही l

छोड़ बोध इस जीवन का जब,

जाना तुझे मदिरालय में ll

संजय सिंह “सलिल”
प्रतापगढ़ ,उत्तर प्रदेशl

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