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6 Feb 2017 · 1 min read

मुक्तक

“जिन्दगी” शाम की कुछ गीत गाने दे मुझे ।
आजमाना हो गया मुस्कुराने दे मुझे ।
रात दिन डुबी हुई , मै किसी की याद मे,
इस लिए कह रही हँसकर हँसाने दे मुझे ।
_______प्रमिलाश्री

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