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6 Feb 2017 · 1 min read

मुक्तक

फिर वही यादें भूली बिसरी हुई आई ।
संग मीठी मधुर खुशबू ,बिखरी हुई आई ।
लौट आई हवा वसंती भी ,आंगन मे मेरे ,
सजी सवंरी रूत बीती ,फरवरी हुई आई ।
__________प्रमिलाश्री

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