Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
5 Feb 2017 · 1 min read

मुद्दतें लगी खुद को चलना सिखाने में,

मुद्दतें लगी खुद को चलना सिखाने में
चंद वक़्त लगा ठोकर को मुझे गिराने में ।
यूँ हीं नही नज़्म-ऐ-गम लिखी जाती ,
जागतें हैं शायर,दर्द को कागज़ों पे लाने में ।

**##@कपिल जैन@##**

Loading...