Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
4 Feb 2017 · 1 min read

बस यूं ही

कर ले तूं मौज
शायद नहीं मिलेगी रोज
न कर कमी
करने में कोई खुराफात
मन के दंगल
और बना ले सारा जंगल
यह समां न
लौट के आये ,मौज करले
अपने हवस की
आग को रोज ठंडा कर ले
पी ले जाम भर कर,
भर के औ दुनिया के मेहमान
जिन्दगी फिर कभी न
दोबारा तुझ को मिलेगी
अपनी बचा के दूसरे
की लूट ले,और
यह कहाँ फिर कभी
दोबारा मिलेगी
हर बात का होता है
अंत, वो तुझ पर
डिपेंड करता है
की
सुखद:: या दुखद::

अजीत

Loading...