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4 Feb 2017 · 1 min read

जन्नत है यह धरती और आकाश

जन्नत है यह धरती
जन्नत है यह आकाश
जन्नत है खुदा की रहमत
बाकि सब शमशान !!

हसरतों को पूरा करती
यह पानी और हवा
उस के नूर कोई कौन समझा
नहीं पैदा हुआ कोई दूजा !!

जानते हैं हम सब
फिर भी हैं अनजान
लोगो की जुबान तो हैं
लेकिन फिर भी हैं अनजान !!

मेहनत करना शान के खिलाफ है
छीन कर लेना जैसे अधिकार है
धरती नै पैदा किया कितना कुछ
फिर भी लेने वाला परेशान हैं !!

आओ मिलकर यह काम करें
न कभी किसी को परेशांन करें
जीवन में जीना सब का अधिकार है
फिर देखो स्वर्ग सा लगता संसार है !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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