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4 Feb 2017 · 1 min read

सभी मूर्तियाँ मिटटी निर्मित या केवल पाषण हैं

सभी मूर्तियाँ मिटटी निर्मित या केवल पाषण हैं,
मात्र भावना है यह मन की, इसीलिए भगवान हैं l

आदि काल से ही मानव ने किया स्रजन है,
छैनी और हतोड़ी का ही किया चयन है l

जाने कितनी प्रतिमाएं गढ़ गढ़ कर छोड़ी,
लेकिन कुछ में श्रद्धा मान किया अर्पण है l

प्राण प्रतिष्ठा हुई तभी तो, वे जग में पहिचान हैं ,
मात्र भावना है यह मन की, इसीलिए भगवान हैं l

द्रष्टि हमारी समुचित हो बस यही मानना,
मन पवित्र हो, बीएस वैसी ही बने भावना l

शीष झुकाया हर पत्थर शिव शंकर जैसा.
मन में ही विश्वास जगा, तब बनी धारणा l

घन्टे, घडियाले जब बजते, पाते तब सम्मान हैं,
मात्र भावना है यह मन की, इसीलिए भगवान हैं l

मन्त्र जगाया हमने ही तो जन मानस में,
श्रद्धा औ विश्वास जगाया है साहस में l

निष्ठा और लगन ने ही जब साथ दे दिया,
उन्हें बनाना सचमुच में अपने ही वश में l

ऊँचे आसन पर बैठाया, तब वे हुए महान हैं,
मात्र भावना है यह मन की, इसीलिए भगवान हैं l

जिनको हमने पूजा वह आराध्य हो गया,
साधन से जो मिला, वही तो साध्य हो गया l

रोली,चन्दन, अक्षत या नैवेद्य चढाया ,
मिली भावना, वर देने को वाध्य हो गयाl

हमने पूजा, सबने पूजा, अब देते वरदान हैं,
मात्र भावना है यह मन की, इसीलिए भगवान हैं l

— डॉ. हरिमोहन गुप्त

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