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2 Feb 2017 · 1 min read

जिंदगी

हर घड़ी कितना हमे है आजमाती जिंदगी |
रोज आँखों में कई सपने जगाती जिंदगी ||

रौशनी की आड़ में छलती रहें हमको सदा |
दीप खुशियों के जला फिर क्यूँ बुझाती जिंदगी ||

नाम के रिश्ते सभी हैं नाम के नाते यहाँ |
इक यही सच है यहाँ हमको बताती जिंदगी ||

झोलियां भरकर खुदा ने दी हमे सौगात है |
प्यास दौलत की भला फिर क्यूँ बढ़ाती जिंदगी ||

जिस गली जाना नहीं क्यूँ राह उसकी पूछते |
सोच कर पग को उठाना है सिखाती जिंदगी ||

खत्म करके ये सफर जाना सभी को एक दिन |
हर घड़ी हर पल हमे फिर क्यों रुलाती जिंदगी ||

कामना यश की करे तो हौसलें मजबूत कर |
हौसलों से आसमां को भी झुकाती जिंदगी ||

भूल कर हर गम ख़ुशी के पल रमा जी ले जरा |
देख फिर कैसे ख़ुशी से खिलखिलाती जिंदगी ||

रमा प्रवीर वर्मा~

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