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2 Feb 2017 · 1 min read

अस्मत

देखा था उसको कई रोज पहले
पहलू में अपनी इज़्ज़त बचाये
सरपट दौड़ता एक बाप
बच्ची को अपनी काँख में दबाये ।।

लूटी थी अस्मत मासूम बाला के
उसने कभी जिसे मामा कहा था
समाज में फैली कुत्सित भावना को छिपाये
एक बाप बदहवास भागा जा रहा था ।।

नैतिकता की अवहेलना जिसने की
इज़्ज़त उसकी गई या इसकी
इन्ही सवालो के जवाब ढूंढ़ने
एक बाप थाने में हाजिरी लगा रहा था।
——–अर्श

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