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30 Jan 2017 · 1 min read

हमारी बेटियाँ

माँ का आईना होती है बेटियाँ
संस्कृति संस्कारों को संजोती हैं बेटियाँ

कोमल भावनामय होती हैं बेटियाँ
रीति रिवाजों को सहेजतीं हैं बेटियाँ

कहीं बोयीं कहीं रोपी जाती हैं बेटियाँ
धान की फसल सी लहलहातीं हैं बेटियाँ

पिता का गुरूर होती हैं बेटियाँ
समाज में मान सम्मान बढ़ाती हैं बेटियाँ

भाई बहन का सौजन्य साथ लेती हैं बेटियाँ
हमनिबालों हमसायों को तरस जाती हैं बेटियाँ

ससुराल में रचबस जाती हैं बेटियाँ
नव समरसता में समा जाती हैं बेटियाँ

मायके ससुराल के बीच सेतु होती हैं बेटियाँ
दोनों के मान मर्यादा का ख्याल रखती हैं बेटियाँ

गोरैया सी चहकती लहकती हैं बेटियाँ
एक मुंड़ेर से दूजी मुंड़ेर चली जाती हैं बेटियाँ

© नीता सिंह बैस

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