Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
28 Jan 2017 · 1 min read

हृदय के विचार

हृदय के विचार।

आज मेरी सीमाओं का
बांध सा टूटा जाता है।
उफन-उफन कर यूं समुद्र
लहरों में बिखर जाता है।
इसके साथ में आने वाले
लाखों शंख अगिनत सीपी
धूमिल होकर आंखों आगे
अंधेरा-सा छा जाता है।
उफन-उफन कर यूं समुद्र
लहरों में बिखर जाता है।
नीले आसमान की भांति
मन नदी में बढ कर पानी
किनारों के ऊपर चढ़ जाए
किनारा पक्का टूट जाता है।
उफन-उफन कर यूं समुद्र
लहरों में बिखर जाता है।
-ः0ः-

Loading...