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28 Jan 2017 · 1 min read

** दो जमात पढ़े नहीं **

जूनूं इश्क का इस क़दर सर चढ़ बोल रहा
हवा में फिर ठहर – ठहर दिल डोल रहा
ना जाने यह फितूर इश्क का उतरेगा कब
दो जमात पढ़े नहीं फिर इश्क मुँह से बोल रहा ।।
?मधुप बैरागी

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