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26 Jan 2017 · 1 min read

मुक्तक

बेक़रार लम्हों से जब बात होती है!
धीरे-धीरे दर्द की शुरुआत होती है!
खोजती है जिन्दगी जामे-पैमानों को,
मयकशी की जैसे तन्हा रात होती है!

#महादेव_की_कविताऐं’

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