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23 Jan 2017 · 1 min read

अब मुझे यूँ आजमाना छोड़ दे

जिंदगी मुझको सताना छोड़ दे
अब मुझे यूँ आजमाना छोड़ दे

हो गए हैं सब यहां पर मतलबी
बेवजह रिश्ते बनाना छोड़ दे

योग्यता की है नहीं कोई कदर
फूल काँटों पे खिलाना छोड़ दे

देख ले भगवान गर इंसान में
आग दहशत की जलाना छोड़ दे

हो रही चर्चा सभी अखबार में
प्यार आँखों से जताना छोड़ दे

बेसमझ हैं लोग ना समझे जुबां
बेसबब बातें बढ़ाना छोड़ दे

डूब ना जाये कभी तू दर्प में
गुण ‘अदिति’ अपने गिनाना छोड़ दे

✍लोधी डॉ. आशा ‘अदिति’
भोपाल

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