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22 Jan 2017 · 1 min read

हाइकु : बेटी

प्रदीप कुमार दाश “दीपक”

बेटी
01.
नन्हीं सी कली
फूल बन बिटिया
महका चली ।
00
02.
कोख से बची
दहेज से बचेगी
गर पढ़ेगी ।
00
03.
जड़ सिंचती
पीहर आती बेटी
ओस की लड़ी ।
00
04.
माता की छाया
पिता का अभिमान
बेटी है शान ।
00
05.
साँस है बेटी
मखमली नर्म सी
घास है बेटी ।
00
06.
फूल ना होंगे
कैसे आएगी बहू
फल पाओगे ।
00
07.
नर न छलो
गर्भ की कन्याओं को
मत संहारो ।
0000
-प्रदीप कुमार दाश “दीपक”
मो. नं. 7828104111

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