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22 Jan 2017 · 1 min read

बिटिया

नन्ही सी गुनगुनी हंसी से
घर आंगन महकाने वाली
भोली सी दो आंखों में सब
सपने सिमटा जाने वाली
बादल की गर्जन सुन सुनकर
गोद को गोद बनाने वाली
हल्की सी इक चोट के कारण
घर भर को घबराने वाली
जीतने वाली हर कक्षा में
अव्वल अव्वल आने वाली
जल्दी-जल्दी खेल कूद कर
मां का हाथ बंटाने वाली
पापा के गंदे जूतों को
पाॅलिश से चमकाने वाली
अम्मा के घुटनों पर मरहम
आधी रात लगाने वाली
बाबा के टूटे चश्मे को
बारिश में जुड़वाने वाली
भाई को अपने से बेहतर
मानने और मनवाने वाली
अपने प्यार की ख़ाक उड़ा कर
घर की लाज बचाने वाली
रिश्तों को सहलाने वाली
रंगों को बिखराने वाली
ख़ुशबू को फैलाने वाली
रौशनियां चमकाने वाली
बिटिया को, मम्मी-पापा ने
एक नए भइया की ख़ातिर
कोख में ही बर्बाद किया है
और ख़ुद को आज़ाद किया है

ज़िया ज़मीर

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