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21 Jan 2017 · 1 min read

बिना तुम्हारे रह न सकूँगा

मेरी पलकों के साये में, ख़्वाब सजाकर तुम पलते हो ।
बिना तुम्हारे रह न सकूँगा, यदि कहते हो, सच कहते हो ।।

इन साँसों का साज अगर है, तो केवल इक अफ़साना है ।
बिना तुम्हारे जीवन मेरा, क्या है..? केवल बीराना है ।
इन साँसों के प्रहरी बनकर, तुम हर पल दिल में रहते हो ..
बिना तुम्हारे……………।।

मेरे हमदम समय मिले तो, पढ़ना कुछ पैगाम लिखा है ।
इन साँसों की पगडण्डी पर, एक तुम्हारा नाम लिखा है ।
मेरे जीवन का सूनापन, दूर तुम्ही बस कर सकते हो….
बिना तुम्हारे…………….।।
राहुल द्विवेदी

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