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19 Jan 2017 · 1 min read

ओह्ह ये मोहःब्बत

कबूले ऐ जुर्म करते हैं हम तेरे कदमो में गिर कर ।
सजाये मौत मंजूर है मगर अब मोहब्बत नही करनी ।।

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