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18 Jan 2017 · 1 min read

पाती प्रेम की

पाती प्रेम की

शब्द शब्द है मुखर
नेह अनुवादों की
अक्षर अक्षर गमक रहा
सुगंध देह की
फ़ैली स्याही महकी
जैसे यादों की
मन में बहके
सुरभि अन्तरमन की
खूश्बु बिखर
प्यार के सोंधापन की
सजल है नयन
है पाती– प्रेम की !

सजन

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