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18 Jan 2017 · 1 min read

ईद चली गई

“ईद चली गई अब तो एक साल तक मजे कर यार।” (चितले ने धोलू के अपने सींग अड़ाते हुए और उसे हल्का सा ठेलते हुए कहा।)

धोलू पिछले काफी दिनों से परेशान हो रहा था क्योंकि उसने अपने मालिक की बात सुन ली थी। उसका मालिक अपने बेटे से कह रहा था कि इस बार कुर्बानी में इन छोटे वालों को कुर्बान नहीं करना है। इनको अभी कुर्बान कर दिया तो कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि ये अभी काफी छोटे हैं और इनका गोश्त भी कम ही होगा। बेटे ने पूछ लिया तो बाप ने बताया कि उनकी किस्मत में कुर्बानी नहीं लिखी है क्योंकि ये किसी काफिर के घर से खरीदे गए हैं, इनको कुर्बान नहीं करेंगे, इनको तो लाली के निकाह में जब बारात आएगी तब काम में लेंगे। बाप-बेटे की सारी बात सुन चुके धोलू ने चितले की तरफ मायूस नजरों से देखते हुए कहा –

“ईद ही तो गई है मेरे भाई, बकरे की किस्मत में तो कटना ही लिखा है ना, फिर चाहे ईद पर कटो या निकाह पर।”

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