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18 Jan 2017 · 1 min read

साइकिल

पिता पुत्र के कोप में, अब आ गया चुनाव I
एक एक चक्का पकड़, साइकिल लगे दाँव II
साइकिल लगे दाँव, होती मुश्किल सवारी I
हवा निकली उसकी, लोग को पड़ती भारी II
कहें विजय कविराय, जनता उसको दे जिता I
जिस ओर चले हवा, वो कहाय जन का पिता II

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