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17 Jan 2017 · 1 min read

कुण्डलिया एक प्रयास

कुण्डलिया एक प्रयास

शर्मो हैया मिट गई ,आधुनिक बना समाज
बोल चाल नये निकले, पहनाव से न लाज
पहनाव से न लाज,मम्मी पहनती जीन्श को
आँचल का ना साज, तड़पे लाल ममता को
दैया रखती ख्याल,संतान पालन बोझ भया
आधुनिक दिखे हाल, मिट गई शर्मो हैया

सजन

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