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17 Jan 2017 · 1 min read

दर्द....

मैं सरिता कल कल करती…मेरी पीड न जाने कोई…
जो भी आता मैल ही धोता…बिन पूछे मुझे हर कोई !

समय के साथ बहती मैं हर पल….जाने है हर कोई….
फिर भी अपने मतलब को मुझे बींध रहा हर कोई !

क्या रंग है मेरा अपना….रंग अपना भर जाता हर कोई…..
दर्द अपना मैं किस से कहूँ…..बेदर्द है हर कोई !

काश फिर से आये भागीरथ….फिर आये शिव कोई…..
मुझको अपने संग में ले ले….पीड रहे न कोई !

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