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14 Jan 2017 · 1 min read

तो फिर वो खुदा नही होता

तो फिर वो भी खुदा नही होता……..आपकी नजर

इश्क़ गर सौ गुना नही होता
इश्क़ में फिर नफा नही होता
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इश्क़ है नाम साझेदारी का
इसमे छोटा बड़ा नही होता
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थाम के ऊँगली औरो के चले
ऐसे कोई खड़ा नही होता
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थाम के हाथ रकीबो का करो
ऐसे भी तो गिला नही होता
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देता न वो ज़बां ख़ामोशी को
पता अपना मिला नही होता
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गऱ वो सबसे जुदा नही होता
तो फिर वो भी खुदा नही होता
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कपिल कुमार
14/01/2017

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