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14 Jan 2017 · 1 min read

है सोच बुलँद अपनी

एक मेरा पुराना शेर…………………आपकी नजर

है सोच बुलंद अपनी ,नजरिया भी न तंग रखते हैं
गुलों को लगाते हैं गले ,खारो को भी संग रखते हैं
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कपिल कुमार
10/01/2017

गुल…….फूल
खार…. कांटे

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