Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
14 Jan 2017 · 1 min read

||बदहाल किसान |हाइकू ||

||बदहाल किसान |हाइकू ||
“पालनहार
होता विमुख आज
अधिकारों से ,

लुटते इन्हे
प्रकृति और नेता
बिखरे आंसू ,

पेट की आग
खत्म होती उम्मीदे
जलता पेट ,

प्रगति चर्चा
ना सुहाए आखों में
जलता पेट .

असामयिक
प्रकृति की वर्षा
तोड़ती आशा ,

होता दफ़न
किताबों में किसान
उलझा शब्द || ”

Loading...