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14 Jan 2017 · 1 min read

मेरी गजलेँ मेरे मुक्तक उसी माँ को समर्पित हैँ

मेरे कदमोँ की आहट को सदा पहचान जाती है

वो गहरी नीँद मेँ होती भी है तो जाग जाती है

मेरी गजलेँ मेरे मुक्तक उसी माँ को समर्पित हैँ

कि जिसके त्याग के आगे ये दुनिया हार जाती है

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